Saturday, 29 May 2010

क़ुरआन सूरह हुज्र- १५

सूरह हुज्र १५ , पारा-१३
The रोचक


मुहम्मद फेस बुक पर


इंटर नेट की एक और वेब साईट 'फेस बुक' पर पाकिस्तानी कठमुल्लाओं ने पाबन्दी लगाने में कामयाबी हासिल करली है। क्या इस से पाकिस्तानी अवाम का कुछ भला होगा बजाय नुकसान के, या आलमी बिरादरी को कोई फ़र्क पड़ने वाला है? दर अस्ल मुआमला ये था कि किसी इदारे ने शरारतन मुहम्मद डे पर मुहम्मद की तस्वीर लोगों से माँगी थी, मुस्लमान जो कुछ करते इदारे पर करते, बंद कर दिया अपने मुल्क में पूरी साईट को. इंटर नेट पर साईट को मैंने देखा, इसमें तुगरे भेज कर सबसे ज़्यादः मुसलमानों ने ही शिरकत की. हालांकी इस्लामी हिमाक़तों की एक यह भी एक तरह की तस्वीर ही है. तस्वीरों में एक तस्वीर दिल को दहला देने वाली छ सात साला बच्ची आयशा की है जिसको औधा कर मुहम्मद उसके साथ मसरूफे-बलात्कार हैं, जो अपनी गुडिया को दर्द के मारे दबोचे हुए है और उसकी आँखें बाहर निकली जा रही हैं. मुहम्मद वहशी जानवर की तरह उस मासूम से मह्जूज़ हो रहे हैं. उफ़! क्या मुसलमानों से ये मुहम्मद की मुस्तनद और तारीखी हक़ीक़त देखी नहीं जाती? इसके चलते वह सच्चाई के दर्पन पर पथराव कर देंगे ? दुन्या के साथ चलना छोड़ देंगे. मुहह्म्मद के जरायम की परतें तो अब खुलना शुरू हुई हैं, अंत होने तक मुस्लमान बेयार ओ मदद गार तनहा रह जाएगा, अगर तौबा करके ईमान दार नहीं बन जाता.आइए चलिए हम ले चलते हैं आपको माज़ी में - - - ''आयशा कहती हैं जिस वक़्त मेरा मुहम्मद से निकाह हुवा मैं छ साल की थी. फिर मक्का से मदीना हिजरत करके पहुँचे तो मुझे बुखार आने लगा, मेरे सर के बाल गिर गए लेकिन अच्छी होने के बाद बाल फिर से निकल कर शानों के नीचे तक लटकने लगे. एक दिन मैं झूले में अपनी सहेलियों के साथ खेल रही थी कि यकायक मेरी वाल्दा ने आकर मुझको डांटा. मैं इनके इस डांटने का मतलब नहीं समझ सकी. वह मुझको वहां से पकड़ कर घर लाईं, मैं हांपने लगी, जब मेरी सांसें थमीं तो उन्हों ने मेरा हाथ, मुंह और सर धुलाया. घर के अन्दर कुछ नसारा औरतें बैठी थीं, उन्होंने वाल्दा के हाथों से मुझे ले लिया और वाल्दा मुझे इन के सुपुर्द करके चली गईं. इन औरतों ने मेरी जिस्मानी हालत को दुरुस्त किया. उसके बाद कोई नई बात पेश नहीं आई. मुहम्मद चाश्त के वक़्त मेरे घर आए, उन औरतों ने मुझे उनके हवाले कर दया. (बुख़ारी-१५३५) नन्हीं आयशा की यह आप बीती है. छ साल की उम्र में निकाह, आठ साल की उम्र में रुखसती, और इसी उम्र में वह हक़ीक़त जो फेस बुक में मुसव्विर ने तस्वीर खींची है. मुसलमानों! किस बात की मुखालिफ़त ? क्या सच्चाई का सामना नहीं कर सकते? क्या यह सब झूट है? क्या ५२ साला बूढ़े ने बच्ची आयशा को बेटी बना लिया था ? अगर तस्वीर देख्नना गवारा न करो तो तसव्वुर में चले जाओ, अपनी बहेन या बेटी को जो भी इन उमरों की हों, क्या किसी रूहानी अय्यार के हवाले करना पसंद करोगे? अगर नहीं तो अपने ज़मीर का साथ दो कि सदाक़त ही ईमान है न कि इस्लाम. और अगर हाँ मुहम्मद को हक बजानिब समझते हों तो तुम्हारे मुंह पर आक़! थू !!


OOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOO


चलो मक्खियों की तरह भिनभिना कर मुहम्मद की तुकबंदी की तिलावत की जाय और आने वाली नस्लों का आकबत राब किया जाय . । .


''अलरा -ये आयतें हैं एक किताब और कुरआन वाज़ेह की.'' सूरह हुज्र,१५ पारा१४आयत (१) अलरा यह बेमानी लफ्ज़ मुहम्मद का छू मंतर है इसके कोई माने नहीं. मुहम्मद बार बार अपनी किताब को वाज़ेह कहते हैं जिसका मतलब होता है स्पष्ट अथवा असंदिग्ध, जब कि कुरआन पूरी तरह से संदिग्ध और मुज़ब्ज़ब किताब है.खुद आले इमरान में आयत ६ में अपनी आयातों को अल्लाह मुशतबह-उल-मुराद(संदिग्ध) बतलाता है. इसी को हम क़ुरआनी तज़ाद (विरोधाभास) कहते है. इसी के चलते सदियों से विरोधाभाषी फतवे ओलिमा नाज़िल किया करते हैं.


''काफ़िर लोग बार बार तमन्ना करेंगे क्या खूब होता अगर वह लोग मुसलमान होते. आप उनको रहने दीजिए कि वह खा लें और चैन उड़ा लें और ख़याली मंसूबा उन्हें ग़फलत में डाले रखें, उन्हें अभी हक़ीक़त मालूम हुई जाती है ''

सूरह हुज्र,१५ पारा१४ आयत (२-३)

काफ़िर लोग हमेशा खुश हल रहे हैं और मुसलमान बद हल। इस्लामी तालीम मुसलमानों को कभी खुश हाल होने ही न देगी, इनकी खुश हाली तो इनका फरेबी आक़बत है जो उस दुन्या में धरा है। सच पूछिए तो अज़ाब ए मुहम्मदी मुसलमानों का नसीब बन चुका है. चौदह सौ साल पहले अहमक़ अल्लाह ने कहा'' उन्हें अभी हक़ीक़त मालूम हुई जाती है '' उसका अभी, अभी तक नहीं आया ?


''और हमने जितनी बस्तियां हलाक की हैं, इन सब के लिए एक मुअययन नविश्ता है। कोई उम्मत न अपनी मीयाद मुक़रररा से न पहले हुई न और न पीछे रही.''

सूरह हुज्र,१५ पारा१४आयत (४-५)

अल्लाह खुद एतरफ कर रहा है कि वह हलाकू है। फिर ऐसे अल्लाह पर सुब्ह ओ शाम लअनत भेजिए किसी ऐसे अल्लाह को तलाशिए जो बाप की तरह मुरब्बी और दयालु हो, नाकि बस्त्तियाँ तबाह करने वाला. उसके सही बन्दे ओसामा बिन लादेन की तरह ही होते हैं जो ? को तबाह करके ? बना सकते हैं.


''और कहा वह शख्स जिस पर कुरआन नाज़िल किया गया तहक़ीक़ तुम मजनूँ हो और अगर तुम सच्चे हो तो हमारे पास फ़रिश्तों को क्यूँ नहीं लाते? हम फ़रिश्तों को सिर्फ़ फ़ैसले के लिए ही नाज़िल किया करते हैं और इस वक़्त उनको मोहलत भी न दी जाती.''

सूरः हुज्र,१५ पारा१४ आयत (६-८)

हदीसों में कई जगह है कि फ़रिश्ते ज़मीन पर आते हैं। पहली बार मुहम्मद को पटख कर फ़रिश्ते ने ही पढाया था''इकरा बिस्म रब्बे कल्लज़ी'' फिर ''शक्कुल सदर'' भी फ़रिश्ते ने किया, मुहम्मद ने आयशा से कह की जिब्रील अलैहिस्सलाम आए हैं तुम को सलाम कर रहे हैं. जंगे बदर में तो हजारों फ़रिश्ते मैदान में शाने बशाने लड़ रहे थे, कई (झूठे) सहबियों ने इसकी गवाही भी दी. अब लोगों के तकाजे पर मंतिक गढ़ रहे हो कि रोज़े हश्र वह नाज़िल होंगे तो कभी कहते हो कि उनके आने पर भूचाल ही आ जाएगा।


''हम ने कुरआन नाज़िल किया, हम इसकी मुहाफ़िज़ हैं. और हम ने आप के क़ब्ल भी अगले लोगों के गिरोहों में भेजा था और कोई उनके पास ऐसा नहीं आया जिसके साथ उन्हों ने मज़ाक न किया हो. इसी तरह ये हम उन मुज्रिमीन के दिलों में डाल देते हैं. ये लोग इस पर ईमान नहीं लाते और ये दस्तूर से होता आया है. अगर उनके लिए आसमान में कोई दरवाज़ा खोल दें फिर ये दिन के वक़्त इस में चढ़ जाएँ, कह देंगे कि हमारी नज़र बंदी कर दी गई है, बल्कि हम लोगों पर तो एकदम जादू कर रखा है.

सूरह हुज्र,१५ पारा१४ आयत (९-१५)

अल्लाह कहता है कि वह खुद लोगों के दिलों में (शर) डाल देता है कि (स्वयंभू ) पैगम्बरों का मज़ाक़ उड़ाया करें। मुहम्मद इस बात को इस लिए अल्लाह से कहला रहे हैं कि बगेर उसके हुक्म के कुछ नहीं होता. यह उनका पहला कथन है. अब लोगों को मुजरिम भी अल्लाह को बना रहा है, जुर्म खुद कर रहा है ? भला क्यों? अल्लाह के पास कोई ईमान और इन्साफ़ का तराज़ू है? कहता है कि ऐसा उसका दस्तूर है? जबरा मारे रोवै न देय. ऐसे अल्लाह पर सौ बार लअनत. मुहम्मद आसमान में दरवाज़ा खोल रहे हैं गोया पानी में छेद कर रहे हैं. मुसलमानों! दर असल तुम्हारी नज़र बंदी कर दी गई है आँखें खोलो, वर्ना - - तुम्हारी दास्ताँ रह जाएगी बस दस्तानों में.


''बेशक हमने आसमान में बड़े बड़े सितारे पैदा किए और देखने वालों के लिए इसको आरास्ता किया और इसको शैतान मरदूद से महफूज़ फ़रमाया, हाँ! कोई बात चोरी छुपे अगर सुन भागे तो इसके पीछे एक रौशन शोला हो लेता है।''

सूरह हुज्र, पारा१४ आयत (१६-१८)

रात को तारे टूटते हैं, ये उसका साजिशी मुशाहिदा है, उम्मी मुहम्मद ने शगूफ़ा तराशा है कि अल्लाह जो आसमान पर रहता है, वहां से ख़ारिज और मातूब किया गया शैतान उसके राजों के ताक में लगा रहता है कि कोई राज़ ए खुदा वंदी हाथ लगे तो मैं उस से बन्दों को भड़का सकूँ, जिसकी निगरानी पर फ़रिश्ते तैनात रहते हैं, शैतान को देखते ही रौशन शोले की मिसाईल दाग देते हैं। जो उसे दूर ताक खदेड़ आतीहै।

मुसलमानों कब तक तुम्हारे अन्दर बलूगत आएगी? कब मोमिन के ईमान पर ईमान लओगे?


जीम। मोमिन ''निसारुल ईमान''


*****************************
हमारी और भी गवाहियाँ हैं । . .


The Rock
Before we give up and go fishing, I'd like to share what Islam had to say about the creation of man। It was one of Muhammad's and Allah's favorite subjects - covered countless times in the Hadith and Qur'an। Since neither were capable of prophecy or miracles, man's existence was used to prove Allah's existence। Tabari I:258 "Allah created Adam from sticky clay, meaning viscous and sweet smelling, from slime, being stinking. It became stinking slime after having been compact soil. Allah formed Adam with His own hand." [Qur'an 15:26] So if a Muslim calls you a "stinking slimeball," thank him. It's a compliment. I think.Yet, Allah forming us out of slime is insulting, and it's contradictory. The referenced verse says: Qur'an 15:26 "We fashioned man from fermented clay, stinking slime, dried tingling hard as we fashioned jinn [demons] from white hot flame." Elsewhere in the Qur'an god created man from "dust," "spurting water," "contemptible water," "a drop of semen," "an embryo," "a single sperm [whose do you suppose?]," "a single cell," "a chewed up lump of flesh," "extract of base fluid," "inordinate haste," or simply "weakness," depending on where you look. There are thirty creation accounts and twenty-two variations. Of course, this must all make sense, because Allah insists there are no contradictions in the Qur'an.Throughout the Sunnah and Qur'an Muhammad falsely attributes Muslim prophet and messenger status to Biblical characters in order to remake them in his image. Most every prophet/messenger listed in the Qur'an came from the Bible, including: Adam, Noah, Seth, Abraham, Lot, Jacob, Joshua, Jonah, Job, Moses, David, Solomon, Saul, Elijah, Ezra, Enoch, John, and Jesus. Moses is mentioned by name in 500 verses, Abraham in 250. Muhammad's non-Biblical list consists of mistakes and myths. For example, the oft-mentioned Hud was from the mythical land of "Ad." (Something Muhammad couldn't do.)
Prophet of Doom

9 comments:

  1. very deliberated post, very concise and up to mark

    ReplyDelete
  2. तुम्हारे ही जैसे मोमिन के रूप में शैतान उस दौर में भी थे, जिन्होंने नबी की मौत के बाद इस तरह की झूठी हदीसें बेतहाशा गढ़ीं. कुरआन में ऐसे लोगों को मुनाफ़िक़ कहा गया है. नबी की बीवी की उम्र छह साल किसी भी तरीके से साबित नहीं होती. लो पढो यहाँ!

    ReplyDelete
  3. मियां जीशान ! सैकड़ो सालों से इस्लाम सच और हक बोलने वालों को क़त्ल करता चला आ रहा है, मेरी बातें कुरआन को आयना दिखलाती हैं, आप दूसरों के आईने में सजते सँवारते हो, ''बुखारी और मुस्लिम'' हदीसें भी अगर ग़लत हैं( जिनको मैं कोट करता हूँ) तो सच क्या हैं? जो तुम्हारी झूठे कलम फरोश कह रहे हैं? आयशा १९ साल की उम्र में ब्याही गई? शर्म करो, एक दम ज़मीर को बेच कर खा गए हो?

    ReplyDelete
  4. जो मुसलमान इन हदीसों को सच मानते हैं वह उल्लू के पट्ठे हैं, और जो इन हदीसों के आधार पर नबी को बदनाम करते हैं वह उनसे भी बड़े उल्लू के पट्ठे हैं. कुरआन को आइना दिखाने वाले कुरआन तो तुम्हारी समझ में कभी आएगा नहीं. ज़रा इन हदीसों पर ही थोड़ी रिसर्च कर लो,
    १. नबी के सहाबी, जिनकी बेटी नबी की बीवी थीं, वह नबी के हमउम्र थे. और उनकी वह बेटी उनकी सबसे बड़ी बेटी थीं. यानी जब नबी ५२ के हुए तो उनकी सहाबी भी ५२ के हुए, तो फिर उनकी सबसे बड़ी बेटी किस फार्मूले से छह साल की हो गयीं?
    २. क्या तुम नबी की बीवी को इतना बेगैरत समझते हो की वह अपनी शादी की दास्ताँ पूरी दुनिया को सुना रही थीं? और सुनने वाले उसे लिख भी रहे थे?

    इस तरह की सारी हदीसें उस ज़माने के यहूदियों और ईसाइयों की चाल थी जिन्होंने उन मुनाफिकों को अपने साथ मिलाकर गढ़ी थीं जो इस्लाम से डर कर कलमा तो पढ़ गए थे लेकिन दिलों में नबी के खिलाफ नफरत भरे हुए थे.
    जब तुम इतनी सी बात नहीं समझ सकते तो कुरआन और नबी को समझना---- क्यों अपनी ज़िन्दगी और मौत दोनों को खराब कर रहे हो?

    ReplyDelete
  5. चाचा अलबेदार की नकल पे ला रहे हो अपने मामा का अनुवाद, अभी समय है आओ

    signature:
    विचार करें कि मुहम्मद सल्ल. कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध मैत्रे, अंतिम ऋषि
    (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टा? हैं या यह big Game against Islam है?
    antimawtar.blogspot.com (Rank-2 Blog) डायरेक्‍ट लिंक

    अल्‍लाह का चैलेंज पूरी मानव-जाति को

    अल्‍लाह का चैलेंज है कि कुरआन में कोई रद्दोबदल नहीं कर सकता

    अल्‍लाह का चैलेंजः कुरआन में विरोधाभास नहीं

    अल्‍लाह का चैलेंजः आसमानी पुस्‍तक केवल चार

    अल्‍लाह का चैलेंज वैज्ञानिकों को सृष्टि रचना बारे में

    अल्‍लाह का चैलेंज: यहूदियों (इसराईलियों) को कभी शांति नहीं मिलेगी

    छ अल्लाह के चैलेंज सहित अनेक इस्‍लामिक पुस्‍तकें
    islaminhindi.blogspot.com (Rank-2 Blog)
    डायरेक्‍ट लिंक

    ReplyDelete
  6. Islam = Sex+Terrorism

    -इस्लाम अय्याशी (चार निकाह, जन्नत में 72 हूरें) और आतंक (जिहाद) का पाठ पढाता है

    -ये लोग अपनी बहनो को भी नहीं छोडते, उनसे निकाह करके बिस्तर में ले जाते हैं

    -कोई मुसलमान हिन्दू धर्म की प्रशंसा कर दे तो उसे मजहब से निकाल देते हैं

    -हिन्दू धर्म ग्रथों को जलाना, मन्दिरों को तोडना, देवी-देवताओं के अश्लील चित्र बनाना, उनके बारे में अपशब्द बोलना इनकी घृणित मानसिकता का प्रमाण है

    - हिन्दुओं को मिटाने या मुसलमान बनाने पर इनको जन्नत रूपी अय्याशी का अड्डा मिलता है

    -मुसलमान (ना)मर्दों को बुरका बहुत भाता है, क्योंकी बुरके में छिपकर ये "बहुत कुछ" करते हैं

    - मुसलमान फर्जी नामों का बुरका पहनकर भौंकते फिरते रहते हैं

    -कुल मिलाकर इस्लाम (ना)मर्दों का मजहब है

    ReplyDelete
  7. मोमिन जिंदाबाद
    सच का आइना दिखाने वाला कोई तो आया
    Islam = Sex+Terrorism

    -इस्लाम अय्याशी (चार निकाह, जन्नत में 72 हूरें) और आतंक (जिहाद) का पाठ पढाता है

    -ये लोग अपनी बहनो को भी नहीं छोडते, उनसे निकाह करके बिस्तर में ले जाते हैं

    -कोई मुसलमान हिन्दू धर्म की प्रशंसा कर दे तो उसे मजहब से निकाल देते हैं

    -हिन्दू धर्म ग्रथों को जलाना, मन्दिरों को तोडना, देवी-देवताओं के अश्लील चित्र बनाना, उनके बारे में अपशब्द बोलना इनकी घृणित मानसिकता का प्रमाण है

    - हिन्दुओं को मिटाने या मुसलमान बनाने पर इनको जन्नत रूपी अय्याशी का अड्डा मिलता है

    -मुसलमान (ना)मर्दों को बुरका बहुत भाता है, क्योंकी बुरके में छिपकर ये "बहुत कुछ" करते हैं

    - मुसलमान फर्जी नामों का बुरका पहनकर भौंकते फिरते रहते हैं

    -कुल मिलाकर इस्लाम (ना)मर्दों का मजहब है

    ReplyDelete
  8. भारत के विनाश और पतन का कारण केवल ब्राह्मण हैं। मेरे लेखों से यह सच्चाई उजागर होते देखकर जनाब बी. एन. शर्मा परेशान हो गये और किसी मत में विश्वास न रखने के बावजूद वे ब्राह्मणी मायाजाल की रक्षा में कमर कसकर मैदान में कूद गये। उन्होंने इस्लाम के बारे में जो कुछ भी कहा वह केवल इसलिये ताकि लोग इस्लाम के नियमों को मानकर ब्राह्मणी मायाजाल से मुक्त न हो जाएं।
    इस्लाम के युद्धों में कमियां निकालने वालों को डा. सुरेन्द्र कुमार शर्मा ‘अज्ञात‘ का यह लेख देखना चाहिये।
    क्या वेद अहिंसावादी हैं ? - डा. सुरेन्द्र कुमार शर्मा ‘अज्ञात‘ The True Hindu
    नीचे इंद्र और उसके युद्धों का वर्णन करने वाले कुछ मंत्र प्रस्तुत हैं :

    त्वमेतात्र् जनराज्ञो द्विदशाबंधुना सुश्रवसोपजग्मुषः ,
    षष्टिं सहसा नवतिं नव श्रुतो नि चक्रेण रथ्या दुष्पदावृणक्
    ( ऋग्वेद , 1-53-9 )
    अर्थात हे इंद्र , सुश्रवा नामक राजा के साथ युद्ध करने के लिए आए 20 राजाओं और उनके 60,099 अनुचरों को तुमने पराजित कर दिया था ।

    इंद्रो दधीचो अस्थभिर्वृत्राण्यप्रतिष्कुतः जघान नवतीर्नव ।
    ( ऋग्वेद , 1-84-13 )
    अर्थात अ-प्रतिद्वंदी इंद्र ने दधीचि ऋषि की हड्डियों से वृत्र आदि असुरों को 8-10 बार नष्ट किया ।

    अहन् इंद्रो अदहद् अग्निः इंद्रो पुरा दस्यून मध्यन्दिनादभीके ।
    दुर्गे दुरोणे क्रत्वा न यातां पुरू सहस्रा शर्वा नि बर्हीत्
    ( ऋग्वेद , 4-28-3 )
    अर्थात हे सोम , तुझे पी कर बलवान हुए इंद्र ने दोपहर में ही शत्रुओं को मार डाला था और अग्नि ने भी कितने ही शत्रुओं को जला दिया था । जैसे किसी असुरक्षित स्थान में जाने वाले व्यक्ति को चोर मार डालता है , उसी प्रकार इंद्र ने हज़ारों सेनाओं का वध किया है ।

    अस्वापयद् दभीयते सहस्रा त्रिंशतं हथैः, दासानिमिंद्रो मायया ।
    ( ऋग्वेद , 4-30-21 )
    अर्थात इंद्र ने अपने कृपा पात्र दभीति के लिए अपनी शक्ति से 30 हज़ार राक्षसों को अपने घातक आयुधों से मार डाला ।

    नव यदस्य नवतिं च भोगान् साकं वज्रेण मधवा विवृश्चत्,
    अर्चंतींद्र मरूतः सधस्थे त्रैष्टुभेन वचसा बाधत द्याम ।
    ( ऋग्वेद , 5-29-6 )
    अर्थात इंद्र ने वज्र से शंबर के 99 नगरों को एक साथ नष्ट कर दिया । तब संग्राम भूमि में ही मरूतों ने त्रिष्टुप छंद में इंद्र की स्तुति की । तब जोश में आकर इंद्र ने वज्र से शंबर को पीड़ित किया था ।

    नि गव्यवो दुह्यवश्च पष्टिः शता सुषुपुः षट् सहसा
    षष्टिर्वीरासो अधि षट् दुवोयु विश्वेदिंद्रस्य वीर्या कृतानि
    ( ऋग्वेद , 7-18-14 )
    अर्थात अनु और दुहयु की गौओं को चाहने वाले 66,066 संबंधियों को सेवाभिलाषी सुदास के लिए मारा गया था । ये सब कार्य इंद्र की शूरता के सूचक हैं ।
    वेदों में युद्ध के लिए युद्ध करना बड़े बड़े यज्ञ करने से भी ज़्यादा पुण्यकारी माना गया है । आज तक जहां कहीं यज्ञ होता है , उस के अंत में निम्नलिखित शलोक पढ़ा जाता है ।
    अर्थात अनेक यज्ञ , कठिन तप कर के और अनेक सुपात्रों को दान दे कर ब्राह्मण लोग जिस उच्च गति को प्राप्त करते हैं , अपने जातिधर्म का पालन करते हुए युद्धक्षेत्र में प्राण त्यागने वाले शूरवीर क्षत्रिय उस से भी उच्च गति को प्राप्त होते हैं ।
    http://vedquran.blogspot.com/2010/04/true-hindu.html

    ReplyDelete
  9. जमाल -- सुरेन्द्र कुमार शर्मा के अनुवाद को कौन हिन्दू मानता है, ये सुरेन्द्र कुमार शर्मा जैसे लोग तुम्हारे जैसे ही भडवे हैं या फिर मुर्ख लोग हैं.
    तुम लोग एक तरफ दुनिया में आतंकवाद फैला रहे हो और दूसरी तरफ अमन-शान्ति की बात करते हो . एक तरफ कुरान के अनुसार वेदों की तारीफ करते हो और दूसरी तरफ जगह-२ वेदों की बुराई. तुम्हरी इन हरामी चालों में कोई नहीं आने वाला. तुम हरामी जेहादी कुत्ते हो जिनको गोली मार देनी चाहिये.

    ReplyDelete