Hi All,
I have started harf-e-galat part 2 .Readers are kindly requested to read my new blog
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-Momin
मैं इस बात का एलान करने में ख़ुशी महसूस कर रहा हूँ कि मैं हर्फ़ ए ग़लत का दूसरा दौर हर्फ़ ए ग़लत part -2 शुरू कर रहा हूँ. एक नए अहेद के साथ कि सच्चाई की राह पर अडिग रहूँगा, जानिब दारी, भावुकता, ज़ुबान ए ख़ल्क़, लिहाज़, लालच या मौत का डर भी मेरे सच बोलने में आड़े नहीं आ सकती. ईमान मेरा धर्म है. ईमान ही हर इंसान का धर्म होना चाहिए. ईमान ही इंसान की मुक्ति और नजात का एक मात्र साधन है. मैं अपने पूरे ईमान के साथ कह रहा हूँ कि इस्लाम ने आज तक दुन्या का सब से ज्यादा अहित किया है. मुसलमान भाई इसे संजीदगी से सोचें और जानें, न कि इस बात को पढ़ कर ही गुस्से से बिफर जाएँ. मसावात के नाम पर अगर कहीं कोई तब्दीली हुई है तो इसकी जंग जू फितरत ने उसको बरक़रार नहीं रक्खा. आज इस्लाम की यही फितरत मुसलमानों को रुस्वाए ज़माना किए हुए है. मुसलमान होश में आएँ, अपने वजूद को बचाएँ. बस ज़रा सा तबदीली करनी है कि मुस्लिम से मोमिन हो जाएँ.
ख़ैर अंदेश
'मोमिन'
थोडा समय मिले तो सबसे कहना कि अभी वक्त है आओ
ReplyDeletesignature:
विचार करें कि मुहम्मद सल्ल. कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध मैत्रे, अंतिम ऋषि
(इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्टा? हैं या यह big Game against Islam है?
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अल्लाह का चैलेंज पूरी मानव-जाति को
अल्लाह का चैलेंज है कि कुरआन में कोई रद्दोबदल नहीं कर सकता
अल्लाह का चैलेंजः कुरआन में विरोधाभास नहीं
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अल्लाह का चैलेंज: यहूदियों (इसराईलियों) को कभी शांति नहीं मिलेगी
छ अल्लाह के चैलेंज सहित अनेक इस्लामिक पुस्तकें
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आज बहन फ़िरदौस ने अपने ब्लॉग पर लिखा है-
ReplyDeleteकाश! आज एक 'मोमिन' तो आ जाए यह सब देखने के लिए...
एक सार्थक पहल का स्वागत है..
ReplyDeleteभारत के विनाश और पतन का कारण केवल ब्राह्मण हैं। मेरे लेखों से यह सच्चाई उजागर होते देखकर जनाब बी. एन. शर्मा परेशान हो गये और किसी मत में विश्वास न रखने के बावजूद वे ब्राह्मणी मायाजाल की रक्षा में कमर कसकर मैदान में कूद गये। उन्होंने इस्लाम के बारे में जो कुछ भी कहा वह केवल इसलिये ताकि लोग इस्लाम के नियमों को मानकर ब्राह्मणी मायाजाल से मुक्त न हो जाएं।
ReplyDeleteइस्लाम के युद्धों में कमियां निकालने वालों को डा. सुरेन्द्र कुमार शर्मा ‘अज्ञात‘ का यह लेख देखना चाहिये।
क्या वेद अहिंसावादी हैं ? - डा. सुरेन्द्र कुमार शर्मा ‘अज्ञात‘ The True Hindu
नीचे इंद्र और उसके युद्धों का वर्णन करने वाले कुछ मंत्र प्रस्तुत हैं :
त्वमेतात्र् जनराज्ञो द्विदशाबंधुना सुश्रवसोपजग्मुषः ,
षष्टिं सहसा नवतिं नव श्रुतो नि चक्रेण रथ्या दुष्पदावृणक्
( ऋग्वेद , 1-53-9 )
अर्थात हे इंद्र , सुश्रवा नामक राजा के साथ युद्ध करने के लिए आए 20 राजाओं और उनके 60,099 अनुचरों को तुमने पराजित कर दिया था ।
इंद्रो दधीचो अस्थभिर्वृत्राण्यप्रतिष्कुतः जघान नवतीर्नव ।
( ऋग्वेद , 1-84-13 )
अर्थात अ-प्रतिद्वंदी इंद्र ने दधीचि ऋषि की हड्डियों से वृत्र आदि असुरों को 8-10 बार नष्ट किया ।
अहन् इंद्रो अदहद् अग्निः इंद्रो पुरा दस्यून मध्यन्दिनादभीके ।
दुर्गे दुरोणे क्रत्वा न यातां पुरू सहस्रा शर्वा नि बर्हीत्
( ऋग्वेद , 4-28-3 )
अर्थात हे सोम , तुझे पी कर बलवान हुए इंद्र ने दोपहर में ही शत्रुओं को मार डाला था और अग्नि ने भी कितने ही शत्रुओं को जला दिया था । जैसे किसी असुरक्षित स्थान में जाने वाले व्यक्ति को चोर मार डालता है , उसी प्रकार इंद्र ने हज़ारों सेनाओं का वध किया है ।
अस्वापयद् दभीयते सहस्रा त्रिंशतं हथैः, दासानिमिंद्रो मायया ।
( ऋग्वेद , 4-30-21 )
अर्थात इंद्र ने अपने कृपा पात्र दभीति के लिए अपनी शक्ति से 30 हज़ार राक्षसों को अपने घातक आयुधों से मार डाला ।
नव यदस्य नवतिं च भोगान् साकं वज्रेण मधवा विवृश्चत्,
अर्चंतींद्र मरूतः सधस्थे त्रैष्टुभेन वचसा बाधत द्याम ।
( ऋग्वेद , 5-29-6 )
अर्थात इंद्र ने वज्र से शंबर के 99 नगरों को एक साथ नष्ट कर दिया । तब संग्राम भूमि में ही मरूतों ने त्रिष्टुप छंद में इंद्र की स्तुति की । तब जोश में आकर इंद्र ने वज्र से शंबर को पीड़ित किया था ।
नि गव्यवो दुह्यवश्च पष्टिः शता सुषुपुः षट् सहसा
षष्टिर्वीरासो अधि षट् दुवोयु विश्वेदिंद्रस्य वीर्या कृतानि
( ऋग्वेद , 7-18-14 )
अर्थात अनु और दुहयु की गौओं को चाहने वाले 66,066 संबंधियों को सेवाभिलाषी सुदास के लिए मारा गया था । ये सब कार्य इंद्र की शूरता के सूचक हैं ।
वेदों में युद्ध के लिए युद्ध करना बड़े बड़े यज्ञ करने से भी ज़्यादा पुण्यकारी माना गया है । आज तक जहां कहीं यज्ञ होता है , उस के अंत में निम्नलिखित शलोक पढ़ा जाता है ।
अर्थात अनेक यज्ञ , कठिन तप कर के और अनेक सुपात्रों को दान दे कर ब्राह्मण लोग जिस उच्च गति को प्राप्त करते हैं , अपने जातिधर्म का पालन करते हुए युद्धक्षेत्र में प्राण त्यागने वाले शूरवीर क्षत्रिय उस से भी उच्च गति को प्राप्त होते हैं ।
http://vedquran.blogspot.com/2010/04/true-hindu.html
जमाल -- सुरेन्द्र कुमार शर्मा के अनुवाद को कौन हिन्दू मानता है, ये सुरेन्द्र कुमार शर्मा जैसे लोग तुम्हारे जैसे ही भडवे हैं या फिर मुर्ख लोग हैं.
ReplyDeleteतुम लोग एक तरफ दुनिया में आतंकवाद फैला रहे हो और दूसरी तरफ अमन-शान्ति की बात करते हो . एक तरफ कुरान के अनुसार वेदों की तारीफ करते हो और दूसरी तरफ जगह-२ वेदों की बुराई. तुम्हरी इन हरामी चालों में कोई नहीं आने वाला. तुम हरामी जेहादी कुत्ते हो जिनको गोली मार देनी चाहिये.