Tuesday, 8 June 2010

क़ुरआन सूरह नह्ल १६

सच का एलान



क़ुरआन मुकम्मल दरोग़, किज़्ब, लग्व, मिथ्य, असत्य और झूट का पुलिंदा है। इसके रचनाकार दर परदा, अल्लाह बने बैठे मुहम्मद सरापा मक्र, अय्यारी, बोग्ज़, क़त्लो-गारत गरी, सियासते-ग़लीज़, दुश्मने इंसानियत और झूटे हैं. इनका तख्लीक़ अल्लाह इंसानों को तनुज्ज़ली के ग़ार में गिराता हुवा इनकी बिरादरी कुरैशियों पर दरूद-सलाम भिजवाता रहेगा, इनके हराम ख़ोर ओलिमा बदले में खुद भी हलुवा पूरी खाते रहेंगे और करोरों मुसलमानों को अफ़ीमी इस्लाम की नींद से सुलाए रखेंगे। मैं एक मोमिन हूँ जो कुछ लिखता हूँ सदाक़त की और ईमान की छलनी से बात को छान कर लिखता हूँ। मैं क़ुरआन का अरबी से उर्दू तर्जुमा मुसम्मी (बमय अलक़ाब) '' हकीमुल उम्मत हज़रत मौलाना अशरफ़ अली साहब थानवी'' को लेकर चल रहा हूँ जो हिंदो-पाक में अपना पहला मुक़ाम रखते हैं. मैं उनका एहसान मंद हूँ कि उनसे हमें इतनी क़ीमती धरोहर मिली. मौलाना ने बड़ी ईमान दारी के साथ अरबी तहरीर का बेऐनेही उर्दू में अक्षरक्ष: तर्जुमा किया जोकि बाद के आलिमों को खटका और उन्होंने तर्जुमें में कज अदाई करनी शुरू करदी, करते करते 'कूकुर को धोकर बछिया' बना दिया.'' हकीमुल उम्मत हज़रत मौलाना अशरफ़ अली साहब थानवी'' ने इस्लामी आलिम होने के नाते यह किया है कि ब्रेकेट(मनमानी) के अन्दर अपनी बातें रख रख कर क़ुरआन की मुह्मिलात में माने भर दिए हैं, मुहम्मद की ग्रामर दुरुस्त करने की कोशिश की है, यानी तालिब इल्म अल्लाह और मुहम्मद के उस्ताद बन कर उनके कच्चे कलाम की इस्लाह की है, उनकी मुताशाइरी को शाइरी बनाने की नाकाम कोशिश की है.'' हकीमुल उम्मत हज़रत मौलाना अशरफ़ अली साहब थानवी'' ने एक और अहेम काम किया है कि रूहानियत के चले आ रहे रवायती फार्मूले और शरीयत की बारीकियों का एक चूँ चूँ का मुरब्बा बना कर नाम रखा 'तफसीर'। जो कुछ कुरआन के तल्ख़ जुज़ थे मौलाना ने इस मुरब्बे से उसे मीठा कर दिया है. तफसीर हाशिया में लिखी है , वह भी मुख़फ़फ़फ़ यानी short form में जिसे अवाम किया ख़वास का समझना भी मोहल है। दूसरी बात मैं यह बतला दूँ कि कुरआन के बाद इस्लाम की दूसरी बुनियाद है हदीसें. हदीसें बहुत सी लिखी गई हैं जिन पर कई बार बंदिश भी लगीं मगर ''बुख़ारी'' और ''मुस्लिम'' की हदीसें मुस्तनद मानी गई हैं मैंने इनको ही अपनी तहरीर के लिए मुन्तखिब किया है। ज़ईफ़ कही जाने वाली हदीसों को छुवा भी नहीं. याद रखें कि हदीसं ही इस्लामी इतिहास की बुन्याद हैं अगर इन्हें हटा दिया जाए तो इस्लाम का कोई मुवर्रिख न मिलेगा जैसे तौरेत या इंजील के हैं क्यूं कि यह उम्मी का दीन है. ज़ाहिर है मेरी मुखालिफत में वह लोग ही आएँगे जो मुकम्मल झूट कुरआन पर ईमान रखते है और सरापा शर मुहम्मद को ''सललललाहो अलैहे वसल्लम'' कहते हैं. जब कि मैं अरब की आलमी इंसानी तवारीख तौरेत Old Testament को आधा सच और आधा झूट मान कर अपनी बात पर कायम हूँ।



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अब आइए मुकम्मल झूट और सरापा शर कि तरफ . . .

''अल्लाह तअला का हुक्म पहुँच चुका है, सो तुम इस में जल्दी मत मचाओ. वह लोगों के शिर्क से पाक और बरतर है. वह फरिश्तों को वह्यी यानी अपना हुक्म भेज कर अपने बन्दों पर जिस पर चाहे नाज़िल फ़रमाते हैं कि ख़बरदार कर दो कि मेरे सिवा कोई लायक़े इबादत नहीं है सो मुझ से डरते रहो. आसमान को ज़मीन को हिकमत से बनाया. वह उनके शिर्क से पाक है. इन्सान को नुतफ़े से बनाया फिर वह यकायक झगड़ने लगा. उसने चौपाए को बनाया, उनमें तुम्हारे जाड़े का सामान है और बहुत से फ़ायदे हैं और उन में से खाते भी हो. और उनकी वजेह से तुम्हारी रौनक़ भी है जब कि शाम के वक़्त लाते हो और जब कि सुब्ह के वक़्त छोड़ देते हो. और वह तुम्हारे बोझ भी ऐसे शहर को ले जाते हैं जहाँ तुम बगैर जान को मेहनत में डाले हुए नहीं पहुँच सकते थे. वाक़ई तुम्हारा रब बड़ी शफ़क़त वाला और रहमत वाला है. और घोड़े और खच्चर और गधे भी पैदा किए ताकि तुम उस पर सवार हो और ज़ीनत के लिए भी.''


सूरह नह्ल १६- परा १४ आयत (१-८)


यह कुर आन की आठ आयतें हैं. मुताराज्जिम ने अल्लाह की मदद के लिए काफी रफुगरी की है मगर मुहम्माग के फटे में पेवंद तो नहीं लगा सकता.१-अल्लाह तअला का हुक्म पहुँच चुका है . . . तो कहाँ अटका है?२-सो तुम इस में जल्दी मत मचाओ - - - किसको जल्दी थी, सब तुमको पागल दीवाना समझते थे.३-वह लोगों के शिर्क से पाक और बरतर है. . .क्या है ये शिर्क? अल्लाह के साथ किसी दुसरे को शरीक करना, न ? फिर तुम क्यूं शरीक हुए फिरते हो.४- अल्लाह को तुम जैसा फटीचर बन्दा ही मिला था कि तुम पर हुक्मरानी नाज़िल कर दिया.५-सो मुझ से डरते रहो - - - आख़िर अल्लाह खुद से बन्दों का डरता क्यूं है?६-अल्लाह इन्सान को कभी नुतफ़े से बनता है, कभी बजने वाली मिटटी से, कभी, उछलते हुए पानी से तो कभी खून के लोथड़े से? तुहारा अल्लाह है या चुगद?७- इन्सान को अगर अल्लाह नेक नियति से बनता तो झगडे की नौबत ही न आती.८- अब इंसान को छोड़ा तो चौपाए खाने पर आ गए, उनकी सिफ़तें गिनाते है जिस पर अलिमान दीन किताबों के ढेर लगाए हुए हैं, न उन पर रिसर्च, न उनकी नस्ल अफ़ज़ाइश पर काम, न उनका तहफ़फ़ुज़ बल्कि उनका शिकार और उन पर ज़ुल्म देखे जा सकते हैं।



'' और वह ऐसा है कि उसने दरया को मुसख़ख़िर (प्रवाहित) किया ताकि उस में से ताजः ताजः गोश्त खाओ और उसमें से गहना निकालो जिसको तुम पहेनते हो. और तू कश्तियों को देखता है कि वह पानी को चीरती हुई चलती हैं और ताकि तुम इसकी रोज़ी तलाश करो और ताकि तुम शुक्र करो. और उसने ज़मीन पर पहाड़ रख दिए ताकि वह तुम को लेकर डगमगाने न लगे. और उसने नहरें और रास्ते बनाए ताकि तुम मंजिले मक़सूद तक पहुँच सको . . . और जो लोग अल्लाह को छोड़ कर इबादत करते हैं वह किसी चीज़ को पैदा नहीं कर सकते और वह ख़ुद ही मख्लूक़ हैं, मुर्दे हैं, जिंदा नहीं और इस की खबर नहीं कि कब उठाए जाएँगे।


सूरह नह्ल १६- परा १४ आयत (१४-२१)


बगैर तर्जुमा निगारों के सजाए यह कुरआन की उरयाँ इबारत है. मुहम्मद बन्दों को कभी तू कहते हैं कभी तुम, ऐसे ही अल्लाह को. कभी ख़ुद अल्लाह बन कर बात करने लगते हैं तो कभी मुहम्मद बन कर अल्लाह की सिफ़तें बयान करते हैं. कहते हैं ''वह पानी को चीरती हुई चलती हैं और ताकि तुम इसकी रोज़ी तलाश करो और ताकि तुम शुक्र करो'' अगर ओलिमा उनकी रोज़े अव्वल से मदद गार न होते तो कुरआन की हालत ठीक ऐसी ही होती ''कहा उनका वो अपने आप समझें या खुदा समझे.'' कठ मुल्ले नादार मुसलमानों को चौदा सौ सालों से ये बतला कर ठग रहे है कि अल्लाह ने ''ज़मीन पर पहाड़ रख दिए ताकि वह तुम को लेकर डगमगाने न लगे.'' मुहम्मद इंसान के बनाए नहरें और रास्ते को भी अल्लाह की तामीर गर्दान्ते हैं. भूल जाते हैं कि इन्सान रास्ता भूल कर भटक भी जाता है मगर कहते हैं '' ताकि तुम मंजिले मक़सूद तक पहुँच सको'' मख्लूक़ को मुर्दा कहते हैं, फिर उनको मौत से बे खबर बतलाते हैं. ''वह ख़ुद ही मख्लूक़ हैं, मुर्दे हैं, जिंदा नहीं और इस की खबर नहीं कि कब उठाए जाएँगे''मुसलामानों की अक्ल उनके अकीदे के आगे खड़ी ज़िन्दगी की भीख माँग रही है मगर अंधी अकीदत अंधे कानून से ज़्यादा अंधी होती है उसको तो मौत ही जगा सकती है, मगर मुसलमानों! तब तक बहुत देर हो चुकी होगी. जागो.मुहम्मद जब अपना कुरआन लोगों के सामने रखते, लेहाज़न लोग सुन भी लेते, तो बगैर लिहाज़ के कह देते '' क्या रक्खा है इन बातों में ? सब सुने सुनाए क़िस्से हैं जिनकी कोई सनद नहीं'' ऐसे लोगों को मुहम्मद मुनकिर (यानी इंकार करने वाला) कहते हैं और उन्हें वह क़यामत के दिन से भयभीत करते हैं. एक ख़ाका भी खीचते हैं क़यामत के दिन का कि काफ़िरो-मुनकिर को किस तरह अल्लाह जहन्नम रसीदा करता है और ईमान लाने वालों को किस एहतेमाम से जन्नत में दाखिल करता है. काफिरों मुशरिकों के लिए . . . '' सो जहन्नम के दवाज़े में दाखिल हो जाओ, इसमें हमेशा हमेशा को रहो, ग़रज़ तकब्बुर करने वालों का बुरा ठिकाना है.'' और मुस्लिमों के लिए ''फ़रिश्ते कहते हैं . . .अस्सलाम अलैकुम! तुम जन्नत में चले जाना अपने आमाल के सबब.''


सूरह नह्ल १६- परा १४ आयत (२२-३४)


इतना रोचक प्लाट, और इतनी फूहड़ ड्रामा निगारी.मुशरिकीन ऐन मुहम्मद का कौल दोहराते हुए पूछते हैं ''अगर अल्लाह तअला को मंज़ूर होता तो उसके सिवा किसी चीज़ की न हम इबादत करते और न हमारे बाप दादा और न हम बगैर उसके हुक्म के किसी चीज़ को हराम कह सकते'' इस पर मुहम्मद कोई माक़ूल जवाब न देकर उनको गुमराह लोग कहते हैं और बातें बनाते हैं कि माज़ी में भी ऐसी ही बातें हुई हैं कि पैगम्बर झुटलाए गए हैं . . . जैसी बातें करने लगे।


सूरह नह्ल १६- परा १४ आयत (35-३७)



''और लोग बड़े ज़ोर लगा लगा कर अल्लाह कि क़समें खाते हैं कि जो मर जाता है अल्लाह उसको जिंदा न करेगा, क्यों नहीं? इस वादे को तो उस ने अपने ऊपर लाज़िम कर रक्खा है, लेकिन अक्सर लोग यक़ीन नहीं करते. . . . हम जिस चीज़ को चाहते हैं, पस इस से हमारा इतना ही कहना होता है कि तू हो जा, पस वह हो जाती है।''


सूरह नह्ल १६- परा १४ आयत (३८+४०)
यह सूरह मक्का की है जब मुहम्मद खुद राह चलते लोगों से क़समें खा खा कर और बड़े ज़ोर लगा लगा कर लोगों को इस बात का यक़ीन दिलाते कि तुम मरने के बाद दोबारा क़यामत के दिन ज़िन्दा किए जाओगे और लोग इनका मज़ाक उड़ा कर आगे बढ़ जाते. मुहम्मद ने अल्लाह को कारसाज़े-कायनात से एक ज़िम्मेदार मुलाज़िम बना दिया है. उनका अल्लाह इतनी आसानी से जिस काम को चाहता है इशारे से कर सकता है तो अपने प्यारे नबी को क्यूँ अज़ाब में मुब्तिला किए हुए है कि लोगों को इस्लाम पर ईमान लाने के लिए जेहाद करने का हुक्म देता है? यह बात तमाम दुन्या के समझ में आती है मगर नहीं आती तो ज़ीशान और आलीशानों के।



''४१ से ५५'' आयत तक मुहम्मद ने अपने दीवान में मोहमिल बका है जिसको ज़िक्र करना भी मुहाल है। उसके बाद कहते हैं



''और ये लोग हमारी दी हुई चीज़ों में से उन का हिस्सा लगते हैं जिन के मुताललिक़ इन को इल्म भी नहीं. क़सम है ख़ुदा की तुम्हारी इन इफतरा परदाज़यों की पूछ ताछ ज़रूर होगी।


सूरह नह्ल १६- परा १४ आयत (५६)


मुहम्मद ज़मीन पर पूजे जाने वाले बुत लात, मनात, उज़ज़ा वगैरा पर चढ़ाए जाने वाले चढ़ावे को देख कर ललचा रहे हैं कि एक हवा का बुत बना कर सब का बंटा धार किया जा सकता है और इन चढ़ावों पर उनका क़ब्ज़ा हो सकता है, वह अपने इस मंसूबे में कामयाब भी हैं.एक अल्लाह ए वाहिद का दबदबा भी क़ायम हो गया है और इन्सान तो पैदायशी मुशरिक है, सो वह बना हुवा है. मुस्लमान आज भी पीरों के मज़ारों के पुजारी हैं,मगर हिदू बालाजी और तिरुपति मंदिरों के श्रधालुओं का मज़ाक उड़ाते हुए।



''और अल्लाह के लिए बेटियां तजवीज़ करते हैं सुबहान अल्लाह!और अपने लिए चहीती चीजें.''


सूरह नह्ल १६- परा १४ आयत (५७)


मुहम्मद भटक कर गालिबन ईसाई अकीदत पर आ गए हैं जो कि खुदा के मासूम फरिश्तों को मर्द और औरत से बाला तर समझते हैं. उनके आकृति में पर, पिश्तान, लिंग आदि होते हैं मगर पवित्र आकर्षण के साथ. मुहम्मद को वह लडकियाँ लगती हैं, वह मानते हैं कि ऐसा ईसाइयों ने खुदा के लिए चुना. और कहते है खुद अपना लिए चाहीती चीज़ यानि बेटा.मूर्ति पूजकों के साथ साथ ये मुहम्मद का ईसाइयों पर भी हमला है।



''और जब इन में से किसी को औरत की ख़बर दी जाए तो सारे दिन उस का चेहरा बे रौनक रहे और वह दिल ही दिल में घुटता रहे, जिस चीज़ की उसको खबर दी गई है । इसकी आर से लोगों से छुपा छुपा फिरे कि क्या इसे ज़िल्लत पर लिए रहे या उसको मिटटी में गाड़ दे. खूब सुन लो उन की ये तजवीज़ बहुत बुरी है.''


सूरह नह्ल १६- परा १४ आयत (५८-५९)


मुल्लाओं की उड़ाई हुई झूटी हवा है कि रसूल को बेटियों से ज़्यादः प्यार हुवा करता था. यह आयत कह रही है कि वह बेटी पैदा होने को औरत की पैदा होने की खबर कहते हैं. बेशक उस वक़्त क़बीलाई दस्तूर में अपनी औलाद को मार देना कोई जुर्म न था बेटी हो या बेटा. आज भी भ्रूण हत्या हो रही है. मुहम्मद से पहले अरब में औरतों को इतनी आज़ादी थी कि आज भी जितना मुहज्ज़ब दुन्या को मयस्सर नहीं. इस मौज़ू पर फिर कभी।



जीम. मोमिन ''निसारुल ईमान''

19 comments:

  1. u r Great

    Islam = Sex+Terrorism

    -इस्लाम अय्याशी (चार निकाह, जन्नत में 72 हूरें) और आतंक (जिहाद) का पाठ पढाता है

    -ये लोग अपनी बहनो को भी नहीं छोडते, उनसे निकाह करके बिस्तर में ले जाते हैं

    -कोई मुसलमान हिन्दू धर्म की प्रशंसा कर दे तो उसे मजहब से निकाल देते हैं

    -हिन्दू धर्म ग्रथों को जलाना, मन्दिरों को तोडना, देवी-देवताओं के अश्लील चित्र बनाना, उनके बारे में अपशब्द बोलना इनकी घृणित मानसिकता का प्रमाण है

    - हिन्दुओं को मिटाने या मुसलमान बनाने पर इनको जन्नत रूपी अय्याशी का अड्डा मिलता है

    -मुसलमान (ना)मर्दों को बुरका बहुत भाता है, क्योंकी बुरके में छिपकर ये "बहुत कुछ" करते हैं

    - मुसलमान फर्जी नामों का बुरका पहनकर भौंकते फिरते रहते हैं

    -कुल मिलाकर इस्लाम (ना)मर्दों का मजहब है

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  2. मोमिन जिंदाबाद
    सच का आइना दिखाने वाला कोई तो आया
    Islam = Sex+Terrorism

    -इस्लाम अय्याशी (चार निकाह, जन्नत में 72 हूरें) और आतंक (जिहाद) का पाठ पढाता है

    -ये लोग अपनी बहनो को भी नहीं छोडते, उनसे निकाह करके बिस्तर में ले जाते हैं

    -कोई मुसलमान हिन्दू धर्म की प्रशंसा कर दे तो उसे मजहब से निकाल देते हैं

    -हिन्दू धर्म ग्रथों को जलाना, मन्दिरों को तोडना, देवी-देवताओं के अश्लील चित्र बनाना, उनके बारे में अपशब्द बोलना इनकी घृणित मानसिकता का प्रमाण है

    - हिन्दुओं को मिटाने या मुसलमान बनाने पर इनको जन्नत रूपी अय्याशी का अड्डा मिलता है

    -मुसलमान (ना)मर्दों को बुरका बहुत भाता है, क्योंकी बुरके में छिपकर ये "बहुत कुछ" करते हैं

    - मुसलमान फर्जी नामों का बुरका पहनकर भौंकते फिरते रहते हैं

    -कुल मिलाकर इस्लाम (ना)मर्दों का मजहब है

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  3. "मैं क़ुरआन का अरबी से उर्दू तर्जुमा मुसम्मी (बमय अलक़ाब) '' हकीमुल उम्मत हज़रत मौलाना अशरफ़ अली साहब थानवी'' को लेकर चल रहा हूँ जो हिंदो-पाक में अपना पहला मुक़ाम रखते हैं. मैं उनका एहसान मंद हूँ कि उनसे हमें इतनी क़ीमती धरोहर मिली. मौलाना ने बड़ी ईमान दारी के साथ अरबी तहरीर का बेऐनेही उर्दू में अक्षरक्ष: तर्जुमा किया"

    "दूसरी बात मैं यह बतला दूँ कि कुरआन के बाद इस्लाम की दूसरी बुनियाद है हदीसें. हदीसें बहुत सी लिखी गई हैं जिन पर कई बार बंदिश भी लगीं मगर ''बुख़ारी'' और ''मुस्लिम'' की हदीसें मुस्तनद (प्रमाणिक)मानी गई हैं मैंने इनको ही अपनी तहरीर (लेखन)के लिए मुन्तखिब किया है। ज़ईफ़ कही जाने वाली हदीसों को छुवा भी नहीं."

    इसे बोल्ड कर दें

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  4. इतने दुधर्ष शोध के बाद तो आपको मोमिन न रहना चाहिये ,आर्य हो जाना चाहिये ।

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  5. परम आर्य से सहमत नहीं... आप एक बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं, करते रहें... कोई भी मुसलमान इन मुद्दों को छूना भी नहीं चाहता..

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  6. islam koi dharm nahi hai yah to kewal arabiyan culchar hai ,jisne duniya me hinsa ,atankbad faila rakha hai .ye sabhi hinduo ke sath satruta jaisa byohar karte hai.
    aapne bahut acchhi jankari di hai iske liye bahut-bahut dhanyabad.

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  7. Tit for tat .
    आप जो कह रहे हैं अपने मन से कह रहे हैं या किसी हदीस से यह बात कह रहे हैं ?
    मैंने जो भी लिखा है आप मुझ से उसका हवाला मांग सकते हैं . मैंने तो कल भी अजित जी के ब्लॉग पर जा कर कहा कि श्री कृष्ण जी ने कभी रस लीला खेलने का पाप नहीं किया . महापुरुष समाज के सामने आदर्श पेश करते हैं . उनके बाद स्वार्थी लोग शोषण करते हैं और महापुरुषों को कलंकित करते हैं . कृपया मेरे लेख देख कर बताएं कि मेरी कौन सी बात अप्रमाणिक है ?

    हिन्दू नारी कितनी बेचारी ? women in ancient hindu culture
    क्या दयानन्द जी को हिन्दू सन्त कहा जा सकता है ? unique preacher
    कौन कहता है कि ईश्‍वर अल्लाह एक हैं
    क्या कहेंगे अब अल्लाह मुहम्मद का नाम अल्लोपनिषद में न मानने वाले ?
    गर्भाधान संस्कारः आर्यों का नैतिक सूचकांक Aryan method of breeding
    आत्महत्या करने में हिन्दू युवा अव्वल क्यों ? under the shadow of death
    वेदों में कहाँ आया है कि इन्द्र ने कृष्ण की गर्भवती स्त्रियों की हत्या की ? cruel murders in vedic era and after that
    गायत्री को वेदमाता क्यों कहा जाता है ? क्या वह कोई औरत है जो ...Gayatri mantra is great but how? Know .
    आखि़र हिन्दू नारियों को पुत्र प्राप्ति की ख़ातिर सीमैन बैंको से वीर्य लेने पर कौन मजबूर करता है ? Holy hindu scriptures
    वेद आर्य नारी को बेवफ़ा क्यों बताते हैं ? The heart of an Aryan lady .
    लंका दहन नायक पवनपुत्र महावीर हनुमान जी ने मन्दिर को टूटने से बचाना क्यों जरूरी न समझा ? plain truth about Hindu Rashtra .

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  8. अनवर जमाल
    तुम इस की पोस्ट का जबाब दो, विना वजह हिन्दू देवी देवताओं को बदनाम मत करो जानकारी नहीं है तो चुप रहो | तुम्हारी बत्मिजियाँ बढ़ती जा रहीं है, अगर कुछ पढ़ा लिखा नहीं है तो अपना मुह बंद रख |
    मैंने तुम सबको चेताया था | कहीं अगर मै शुरू हो गया तो भागने की जगह नहीं मिलेगी | जबकि मै तुम लोगों इतना बेवकूफ नहीं हूँ , फिर भी अपनी गदगी को अपने पास रखो और अपने फटे को सिलो,

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  9. अनवर जमाल
    तुम्हारे अपने ने ही जब तुम्हारी असलियत खोलनी शुरू की तो भगवान याद आने लगे | अरे इसी का जबाब दे | तेरी बुद्धि हिन्दू धर्म को नहीं समझ सकती क्योंकि तू उन गद्दारों का वंसज है जिन्होंने मुस्लिम आक्रमणकारियों से जान बचाने के लिए अपना धर्म बदल लिया| खुद को संभालो , खुद की फटी सिलो मै अभी चुप हूँ कही इतिहास खोल बैठा तो क्या होगाइसका तुम्हे अंदाजा नहीं है |

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  10. मैं एक मोमिन हूँ जो कुछ लिखता हूँ सदाक़त की और ईमान की छलनी से बात को छान करलिखता हूँ.
    उस चलनी से छानने के बाद बचे हुए कूड़े को तू यहाँ फेंक रहा है. ईमान तो तेरे हाथ से कब का रुखसत हो चुका है.
    बेशक उसवक़्त क़बीलाई दस्तूर में अपनी औलाद को मार देना कोई जुर्म न था बेटी हो या बेटा
    इसे कहते हैं कमीनी सोच. तू औलाद को मार देने के कबीलाई दस्तूर को सही ठहरा रहा है और नबी के सुधार को गलत कह रहा है. धीरे धीरे तेरी असलियत सामने आ रही है, मोमिन के भेस में छुपे शैतान.

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  11. अनवर जमाल साहब!
    मैं ने एलन कर रखा है कि मैंने कुरआन 'शौकत अली थानवी' का तर्जुमा और हदीसें 'बुखारी' या 'मुस्लिम' को लेकर ही चलता हूँ जिसमें आयत और हदीस नंबर काहवाला साफ़ साफ़ रहता है.

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  12. परम आर्य जी
    आप ने मुझे समझा नहीं. मैं ''मोमिन'' हूँ और आखिरी साँस तक मोमिन रहूँगा. मुस्लिम और आर्यन बन्ने की मुझे ज़रुरत नहीं.'' मोमिन'' की परिभाषा पहलेआप मेरे लेखों को पढ़ कर जानें फिर शायद आप भी मोमिन बनना चाहें.

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  13. मोमिन : एक क्रांति का नाम है. मोमिन ने इस्लाम के कुत्तों को उनकी औकात बता दी है.
    इस्लाम अय्याशी और हिंसा का मजहब है. इसको मानने वाले मुहम्मद उमर कैरान्वी, जमाल, असलम कासमी, सलीम खान, अयाज अहमद, सफत आलम, एजाज इदरीसी, जीशान, इम्पैक्ट, खुर्सीद जैसे देशद्रोही, कृतध्न, जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं, ब्लोगों पर हिन्दुओं के विरुद्ध इतना विष वामन करते हैं तो इनकी मस्जिदों में क्या नही होता होगा? कोई भी अनुमान लगा सकता है. विदेश से पैसा लेकर इस्लाम का प्रचार और हिन्दू धर्म का अपमान कर रहे हैं.

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  14. चमन में होने दो बुलबुल को फूल के सदके
    बलिहारी जाऊँ मै तो अपने रसूल के सदके

    सदा बहार सजीला है रसूल मेरा
    हो लाखपीर रसीला है रसूल मेरा
    जहे जमाल छबीला है रसूल मेरा
    रहीने इश्क रंगीला है रसूल मेरा

    चमन में होने दो बुलबुल को फूल के सदके
    बलिहारी जाऊँ मै तो अपने रसूल के सदके

    किसी की बिगड़ी बनाना है ब्याह कर लेंगे
    बुझा चिराग जलाना है ब्याह कर लेंगे
    किसी का रूप सुहाना है ब्याह कर लेंगे
    किसी के पास खजाना है ब्याह कर लेंगे

    चमन में होने दो बुलबुल को फूल के सदके
    बलिहारीजाऊँ मै तो अपने रसूल के सदके

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  15. मंधाता की पत्नी शशिबिन्दु से बिन्दुमती नाम की लड़की हुई। उससे पुरुकुत्स, अम्बरीष (द्वितीय) तथा मुचुकुंद हुए। तथा इनके पचास बहनें थीं। पचासों बहनों के साथ सौभरि ब्राह्मण ने विवाह कर लिया। कहानी इस प्रकार हैᄉ एक बार एक मल्लाह यमुना नदी के पास अपनी पत्नियों के साथ विहार कर रहा था। वहीं सौभरि ब्राह्मण जल में खड़े तपस्या कर रहे थे। निषाद को जलक्रीड़ा करते देख वह कामांध हो गया। वहां से राजा मंधाता के पास गया और मंधाता से एक कन्या का विवाह अपने साथ करने को कहा।
    राजा ने कहा कि इनमें से कोई पसंद कर लें और विवाह कर लीजिए। ब्राह्मण बूढ़ा और कमजोर था। नसें दिखाई पड़ रही थीं। आंखें कमजोर, बाल सफेद हो गये थे। उसने कहा मुझे पचासों पसंद हैं। उसने पचासों उस बूढ़े ब्राह्मण सौभरि को दे दीं।
    उस समय क्षत्रिायों के यहां लड़कियां मार दी जाती थीं। ब्राह्मणों को बिना ब्याहे ही दान दे दिया करते थे। पचासों लड़कियां उस बूढ़े ब्राह्मण के साथ जंगल चली गयीं। घुट घुट कर मर गयीं।
    मंधाता के पुत्राों में अम्बरीष था। मंधाता के वंश तीन अवांतर गोत्राों के प्रवर्तक हुए। पुरुकुत्स का विवाह नर्मदा नाम की कन्या जो, नागवंश की थी, के साथ हुआ। वह दक्षिणी भारत का राजा था। उससे त्रासदस्यु, त्रासदस्यु से अनरण्य, अनरण्य से हर्यश्रव उसके अरुण और त्रिाबंधन हुए। त्रिाबंधन से सत्यव्रत हुआ। वही पिता व गुरु की आज्ञा न मानने पर चांडाल हो गया। यहीं से चांडाल वंश चला। उसे देवताओं ने स्वर्ग से ढकेल दिया। वह बीच में लटक गया। अर्थात्‌ न शूद्र रहा न आर्य। वह चांडाल हो गया तो शव जलाने का काम करता था। उसे ही त्रिाशंकु कहते हैं।
    हरिश्चंद्रᄉ त्रिाशंकु का पुत्रा हरिश्चंद्र था। वरुण देव की कृपा से उसके रोहित नाम का पुत्रा हुआ। यह वही हरिश्चंद्र हैं जिन्हें सत्यवादी कहा जाता है। वास्तविकता यह है कि वे काशी में चांडाल के यहां बेचे नहीं गये थे। बल्कि विश्वामित्रा द्वारा छल से राजपाट छीन लिए जाने के बाद अपने रिश्तेदार काशी के कालू डोम के यहां पत्नी सहित रहने लगे थे और श्मशान घाट में मुर्दे जलाते थे।
    वरुण ने पुत्रा उत्पन्न करने के पूर्व हरिश्चंद्र से उसके पुत्रा को यज्ञ में यजन करने का वादा कराया था। यजन का अर्थ बलि से है। रोहित को यज्ञ पशु मान कर जन्म के दस दिन बाद उसे यज्ञ में बलि के लिए कहा।
    हरिश्चंद्र ने कहा यज्ञ पशु के जब दांत निकल आयेंगे, तब यज्ञ योग्य होगा।
    जब दांत आ गये तब वरुण ने कहा अब बलि के लिए दो। हरिश्चंद्र ने कहा जब दांत गिर जायेंगे, तब यज्ञ योग्य होगा। दूध के दांत गिर गये। वरुण ने फिर वही बात दोहरायी। हरिश्चंद्र ने कहा पुनः दांत उग आने पर बलि के योग्य होगा।
    दांत आने पर हरिश्चंद्र ने कहा कि क्षत्रिाय पशु तब यज्ञ के योग्य होता है जब कवच धारण करने लगे। इस तरह वरुण चांडाल वंश को नष्ट करना चाहता था।
    रोहित को पता चला कि वरुण मुझे बलि दिलाना चाहता है तो वह अपने प्राणों की रक्षा में धनुष लेकर जंगल चला गया। वरुण ने नाराज होकर हरिश्चंद्र पर आक्रमण कर दिया। रोहित ने अपने पिता की सहायता के लिए वन से लौटना चाहा तो इंद्र ने रास्ते में मना कर दिया। जितनी बार रोहित घर लौटने की सोचता, इंद्र बूढ़ा ब्राह्मण बन कर उसको रोक देता।
    इधर वरुण को मझले पुत्रा शुनशेय को देकर यज्ञ पुत्रा बना कर उसकी बलि दी। उस यज्ञ में विश्वामित्रा होता थे। जमदग्नि, वशिष्ठ, ब्रह्मा आदि यज्ञ में शामिल थे। उसके मझले पुत्रा की बलि से इंद्र आदि प्रसन्न थे।
    इतनी निर्दयी कथाओं को सुन कर हिन्दू समाज प्रसन्न होता है। एक भी हिन्दू ऐसा नहीं है जो इनके घृणित कार्यों की निन्दा करे। इतनी कठोर यातनाएं देने के बाद हरिश्चंद्र को राज्य का अवसर दिया।

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  16. भारत के विनाश और पतन का कारण केवल ब्राह्मण हैं। मेरे लेखों से यह सच्चाई उजागर होते देखकर जनाब बी. एन. शर्मा परेशान हो गये और किसी मत में विश्वास न रखने के बावजूद वे ब्राह्मणी मायाजाल की रक्षा में कमर कसकर मैदान में कूद गये। उन्होंने इस्लाम के बारे में जो कुछ भी कहा वह केवल इसलिये ताकि लोग इस्लाम के नियमों को मानकर ब्राह्मणी मायाजाल से मुक्त न हो जाएं।
    इस्लाम के युद्धों में कमियां निकालने वालों को डा. सुरेन्द्र कुमार शर्मा ‘अज्ञात‘ का यह लेख देखना चाहिये।
    क्या वेद अहिंसावादी हैं ? - डा. सुरेन्द्र कुमार शर्मा ‘अज्ञात‘ The True Hindu
    नीचे इंद्र और उसके युद्धों का वर्णन करने वाले कुछ मंत्र प्रस्तुत हैं :

    त्वमेतात्र् जनराज्ञो द्विदशाबंधुना सुश्रवसोपजग्मुषः ,
    षष्टिं सहसा नवतिं नव श्रुतो नि चक्रेण रथ्या दुष्पदावृणक्
    ( ऋग्वेद , 1-53-9 )
    अर्थात हे इंद्र , सुश्रवा नामक राजा के साथ युद्ध करने के लिए आए 20 राजाओं और उनके 60,099 अनुचरों को तुमने पराजित कर दिया था ।

    इंद्रो दधीचो अस्थभिर्वृत्राण्यप्रतिष्कुतः जघान नवतीर्नव ।
    ( ऋग्वेद , 1-84-13 )
    अर्थात अ-प्रतिद्वंदी इंद्र ने दधीचि ऋषि की हड्डियों से वृत्र आदि असुरों को 8-10 बार नष्ट किया ।

    अहन् इंद्रो अदहद् अग्निः इंद्रो पुरा दस्यून मध्यन्दिनादभीके ।
    दुर्गे दुरोणे क्रत्वा न यातां पुरू सहस्रा शर्वा नि बर्हीत्
    ( ऋग्वेद , 4-28-3 )
    अर्थात हे सोम , तुझे पी कर बलवान हुए इंद्र ने दोपहर में ही शत्रुओं को मार डाला था और अग्नि ने भी कितने ही शत्रुओं को जला दिया था । जैसे किसी असुरक्षित स्थान में जाने वाले व्यक्ति को चोर मार डालता है , उसी प्रकार इंद्र ने हज़ारों सेनाओं का वध किया है ।

    अस्वापयद् दभीयते सहस्रा त्रिंशतं हथैः, दासानिमिंद्रो मायया ।
    ( ऋग्वेद , 4-30-21 )
    अर्थात इंद्र ने अपने कृपा पात्र दभीति के लिए अपनी शक्ति से 30 हज़ार राक्षसों को अपने घातक आयुधों से मार डाला ।

    नव यदस्य नवतिं च भोगान् साकं वज्रेण मधवा विवृश्चत्,
    अर्चंतींद्र मरूतः सधस्थे त्रैष्टुभेन वचसा बाधत द्याम ।
    ( ऋग्वेद , 5-29-6 )
    अर्थात इंद्र ने वज्र से शंबर के 99 नगरों को एक साथ नष्ट कर दिया । तब संग्राम भूमि में ही मरूतों ने त्रिष्टुप छंद में इंद्र की स्तुति की । तब जोश में आकर इंद्र ने वज्र से शंबर को पीड़ित किया था ।

    नि गव्यवो दुह्यवश्च पष्टिः शता सुषुपुः षट् सहसा
    षष्टिर्वीरासो अधि षट् दुवोयु विश्वेदिंद्रस्य वीर्या कृतानि
    ( ऋग्वेद , 7-18-14 )
    अर्थात अनु और दुहयु की गौओं को चाहने वाले 66,066 संबंधियों को सेवाभिलाषी सुदास के लिए मारा गया था । ये सब कार्य इंद्र की शूरता के सूचक हैं ।
    वेदों में युद्ध के लिए युद्ध करना बड़े बड़े यज्ञ करने से भी ज़्यादा पुण्यकारी माना गया है । आज तक जहां कहीं यज्ञ होता है , उस के अंत में निम्नलिखित शलोक पढ़ा जाता है ।
    अर्थात अनेक यज्ञ , कठिन तप कर के और अनेक सुपात्रों को दान दे कर ब्राह्मण लोग जिस उच्च गति को प्राप्त करते हैं , अपने जातिधर्म का पालन करते हुए युद्धक्षेत्र में प्राण त्यागने वाले शूरवीर क्षत्रिय उस से भी उच्च गति को प्राप्त होते हैं ।
    http://vedquran.blogspot.com/2010/04/true-hindu.html

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